सर्वप्रथम तो आपको बता देता हूं कि मेरे द्वारा लिखी गयी पोस्ट शुभ कर्म को ही निर्देश करती हैं।(शान्तिकर्म)
तंत्र शास्त्र में षट्कर्म प्रक्रियाओं द्वारा अनुष्ठान किये जाते हैं।
विद्वानों ने शान्ति,वशीकरण,स्तम्भ,विद्वेषण,उच्चाटन,और मारण,इन छःप्रकार की प्रक्रियाओं को षट्कर्म बताया है।।
शुभकर्म के अन्तर्गत पोस्ट ही साझा करूंगा।
किसी का अहित करने की इच्छा रखनें वाले मेरी पोस्ट में रुचि न रखें।।(करबद्ध प्रार्थना)
तंत्र विद्या की सिद्धि या इस विद्या का प्रयोजन अपनी आत्मा की रक्षा,देवताओं की प्रसन्नता,सज्जन व्यक्ति की रक्षा,अबोध का कष्ट निवारण,परोपकारीयों की रक्षा करना तंत्र शास्त्र का सदुपयोग एवं सिद्धि है।
सबसे पहले तंत्र के अन्तर्गत में रोग निवारण बताता हूँ।
प्रथम ज्वर निवारण एवं नकारात्मक ऊर्जा निवारण>
●लोहबान,गौघृत,हींग,देवदार,इन्द्रजौ,पीलीसरसों,बच,नीमपत्र,और मोरपंख इनको गौमूत्र से शुद्ध करके चूर्ण बनाकर धूप देने से ज्वर,ग्रहदोष,भूत,पिशाच,पूतना,शाकिनी,एकाहिक,द्वाहिक,त्र्याहिक,और चातुर्थिक ज्वर तथा अन्य प्रकार के दुःखदायी रोग तुरंत शान्त हो जातें है।।
Astrolivepawan.blogspot.com ,Pawankhandal39@gmail.com Ph.9462525905,8952825905
तंत्र शास्त्र में षट्कर्म प्रक्रियाओं द्वारा अनुष्ठान किये जाते हैं।
विद्वानों ने शान्ति,वशीकरण,स्तम्भ,विद्वेषण,उच्चाटन,और मारण,इन छःप्रकार की प्रक्रियाओं को षट्कर्म बताया है।।
शुभकर्म के अन्तर्गत पोस्ट ही साझा करूंगा।
किसी का अहित करने की इच्छा रखनें वाले मेरी पोस्ट में रुचि न रखें।।(करबद्ध प्रार्थना)
तंत्र विद्या की सिद्धि या इस विद्या का प्रयोजन अपनी आत्मा की रक्षा,देवताओं की प्रसन्नता,सज्जन व्यक्ति की रक्षा,अबोध का कष्ट निवारण,परोपकारीयों की रक्षा करना तंत्र शास्त्र का सदुपयोग एवं सिद्धि है।
सबसे पहले तंत्र के अन्तर्गत में रोग निवारण बताता हूँ।
प्रथम ज्वर निवारण एवं नकारात्मक ऊर्जा निवारण>
●लोहबान,गौघृत,हींग,देवदार,इन्द्रजौ,पीलीसरसों,बच,नीमपत्र,और मोरपंख इनको गौमूत्र से शुद्ध करके चूर्ण बनाकर धूप देने से ज्वर,ग्रहदोष,भूत,पिशाच,पूतना,शाकिनी,एकाहिक,द्वाहिक,त्र्याहिक,और चातुर्थिक ज्वर तथा अन्य प्रकार के दुःखदायी रोग तुरंत शान्त हो जातें है।।
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