(वर्षफल) ताजिक >वर्षफल अपने आप में एक श्रेष्ठ और अद्वित्यीय ज्योतिष साधन है,जिसके द्वारा हम प्रत्येक वर्ष प्रत्येक मास और प्रत्येक दिन का सूक्ष्म से सूक्ष्म भविष्य ज्ञात कर सकते है! >वर्षफल पद्धति ही ताजिक कहलाती है! इस पद्धति में एक एक वर्ष का अलग-अलग फल तथा प्रत्येक वर्ष में नवग्रहों के स्वतंत्र फल को महत्व दिया गया है,नवग्रहों को स्वीकार करते हुए भी उनमे एक एक ग्रह को सर्वाधिक महत्व दिया गया है, जिसे वर्षेश कहा जाता है! >निम्न पांच ग्रहो को वर्ष में प्रधानता दी और इसमें से जो सर्वाधिक बली हो,उसे वर्षेश माना !ये पांच ग्रह हैं -१ जन्मकुंडली के लग्न राशि का स्वामी! २ वर्षफल कुंडली के लगन राशि का स्वामी! ३ मुंथेश ! ४ त्रिराशिपति एवं ५ दिन में प्रवेश हो तो सुर्याधिष्ठित राशि का स्वामी एवं रात्रि में प्रवेश हो तो चन्द्राधिष्ठित राशि का स्वामी! इन पांचो ग्रहों में जो सर्वाधिक बली ग्रह हो,उसे वर्षेश कहते हैं!
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